Thursday, December 6, 2007

Maa.n ka sapnaa (माँ का सपना)

हर औरत माँ बनने के पूर्व
कुछ सपने बुनती है
( समय बीतते देर कहाँ लगती है)

कुछ समय बाद
माँ बच्चे के साथ साथ सपना
पूरा करने की खतिर उसकी
नाप लेती उसे सुंदर बुनावट, आकार
देती है

एक समय ऐसा आता है
जब बच्चा सपने की झिल्ली काटकर
अचानक इतना बड़ा हो जाता है कि
वह माँ को सपनों का भरा पूरा
आकाश दिखाता है, माँ हमेशा से
हकीकत के दायरे से बाहर सपने के
भीतर जीने की आदी हो चुकी है

और आखिरकार
बच्चा माँ को धीरे से सपनों का
जादू दिखाकर एक दिन कब्र में
दफनाकर चला आता है

दुनिया समझती है
दोनो को एक - दूसरे से बेहद प्यार था
माँ का सपना हमेशा हमेशा को चुक जाता है

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