Thursday, December 6, 2007

Andon se choojon ki chaah mein (अण्डों से चूजों की चाह में)

पत्ते निश्चिंत हैं
फूल निश्चिंत हैं
शाखें निश्चिंत हैं

जड़ें गहरी चिंता में डूबती जा रही हैं
तने की छाल छूट रही है
भीतर शुष्कता की दीमक चूस गयी सांद्रता

हल्का सा हवा का झोंका आते ही
थरथराता हुआ दरख्त चड़चड़ाने लगता है

आक्रोश में दबी चीख किसी को सुनायी नहीं देती
परिंदों की दस्तक कंपकंपा देती है

दरख्त में अब भी
कुछ परिंदों के घोसले, अँडे
पीली कुम्हलायी पत्तियों में सुरक्षित हैं

और कितनी बार
अँडों से निकलने वाले चूजों की चाह में
वो ज़िन्दा रहेगा

Maa.n ka sapnaa (माँ का सपना)

हर औरत माँ बनने के पूर्व
कुछ सपने बुनती है
( समय बीतते देर कहाँ लगती है)

कुछ समय बाद
माँ बच्चे के साथ साथ सपना
पूरा करने की खतिर उसकी
नाप लेती उसे सुंदर बुनावट, आकार
देती है

एक समय ऐसा आता है
जब बच्चा सपने की झिल्ली काटकर
अचानक इतना बड़ा हो जाता है कि
वह माँ को सपनों का भरा पूरा
आकाश दिखाता है, माँ हमेशा से
हकीकत के दायरे से बाहर सपने के
भीतर जीने की आदी हो चुकी है

और आखिरकार
बच्चा माँ को धीरे से सपनों का
जादू दिखाकर एक दिन कब्र में
दफनाकर चला आता है

दुनिया समझती है
दोनो को एक - दूसरे से बेहद प्यार था
माँ का सपना हमेशा हमेशा को चुक जाता है

Aakhri baar (आखिरी बार)

पहला प्यार
एक बार - सौ बातें
हजार शर्तें लेकर आता है
आदमी बेबस हो जाता है

मैंने
तुम्हे प्यार किया
बंद दरवाजों से चौराहे तक
तुम मुझे ले आयी

प्यार परवान चढ़ता तब
जब सौ बातें
हजार शर्तें होती

हम चुप ही रहे
हमने प्यार किया
प्यार की तरह
तुम मेरी सांसों मे जीती रही
मैं तुम्हारी आंखों मे बसता रहा

दूसरी बार
तुम मेरी अंगुलियां पकड़े थी
मै तुम्हारे होंठों से चिपका रहा

तीसरी बार
तुम मेरे रोम रोम मे समा गयी
मैं तुम्हारी देह में घुलता रहा

इस तरह
प्यार हम दोनों के बीच सीमित
रहकर फैलता रहा

इस बार
तुमने मुझे कोख दी
मैं तुम्हारी नस नस चूसता रहा

आखिरी बार
इस तरह प्यार किया
सौंप दिया सब कुछ

तुमने मुझे
एक बार फिर
प्यार करने की इजाजत दी
खुद को मिटा दिया
मेरे लिये