My Poetries

मुकाम

काश तेरी हंसी जुल्फ के साये
मेरा ख्वाब होते
पिरोता नगमों को उन्हीं में
बनाता दिल का मुकाम

बेवफ़ाई

बुलन्दियों को छूकर
मेरी यादों को न छेड़ो
हवा बन जायेगी एक दिन
तेरी बेवफ़ाई की कहानी

याद

मेरी यादों के झरोखे
तुझे एक दिन रुलायेंगे
चले जो दो कदम अकेले
कदम खुद ही डगमगायेंगे

रुसवाई

खेले हैं हम तूफां से
तेरी मुहब्बत पाने को
कहते हो फिर क्यों
अपने नहीं बेगाने हो

एहसास

गुजरे थे अभी तक
काँटों भरी गलियों से
आया जो उनकी राह से झोंका
फूलों की महक आने लगी

परछाईयाँ

हम वो नहीं हैं जो
टिमटिमाते हैं रात्रि को
हम तो वो परछाईयाँ हैं
जो अमावस को निकलती हैं

तारीफ

याद करती होंगी उन्हें
तारीफ के काबिल हैं जो
हम भला आपकी
तरीफ के काबिल कहाँ

अँधेरे

कलियों की गलियों में
भौंरो के फेरे
है जिन्दगी में उजाला
तो बने क्यों अँधेरे

झलक

यादों की कशमकश में
कई रातें गुजार दी
आँखों में एक झलक
आयी थी जो उनकी

अक्श

मौसम बहारों के आते हैं
चले जाते हैं
रँगीन फ़िज़ाओं के कुछ
नक्श छोड़ जाते हैं
देखे थे कभी हमने
जो ख्वाब मोहब्बत के
दिल से उन ख्वाबों के
अक्श नहीं जाते हैं

अनजान

आप हमसे दूर हैं कितने
मालूम कहाँ शायद
पर करीब हैं हम
आपको भी कहाँ खबर है

हसरत

है कहीं उल्फ़त की सज़ा
काँटो भरी गलियों से गुजरना
कर लेंगे हसरतें दफ़न यों ही
समेट लेंगे उन यादों का बिखरना

टूटे सितारे

टूटे हुए तारे फिर से जमीं पे ला दो
गमों के ज़ाम इन आँखों से पिला दो
होंगे हासिये दूर कहीं बहते हुए
किसी शायर का कलाम इन लबों पे ला दो

साये दर्द के

जरा ठहर जाओ
दिये अभी बुझाये हैं
गमों की रात गुजरी थी नहीं
जिंदगी में दर्द के साये हैं
ढलते पहर जब से आये हैं
काफ़िलों के बुत बनायें हैं